Newsletter #12 – हिन्दी / Hindi

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प्रिय साथियों,

जून के शुरुआत के साथ ही हम आपको हमारी बारहवीं पत्रिका भेज रहे है|

मई पर अब्दुल्ला ओजलान के आज़ादी के लिए भूख हड़ताल कर रहे साथियों की बढ़ती बिकट स्थिति छायी रही| मई २६ को ओजलान से ही हड़तालियों के लिए सीधा सन्देश आया जिसमे उन्होंने हड़ताल समाप्त करने का आव्हान किया था| ओजलान के बलपूर्वक एकांत के समाप्ति के साथ ही हमारी भूख हड़ताल ने एक महत्त्वपूर्ण लक्ष्य हासिल किया है और सीरिया और तुर्कस्तान के बीच की समस्या के राजकीय हल की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाना मुमकिन किया है| यह कदम हजारो हड़तालियों के कड़े संघर्ष के बाद मुमकिन हुआ है| इनमे से कुछ साथी २०० दिन तक भूख हड़ताल पे थे| लैला गुवेन के नेतृत्व में उभरे इस ऐतिहासिक संघर्ष में शामिल सभी साथियों को एक अन्तरराष्ट्रीयतावादी कम्यून होने के नाते हमारा क्रान्तिकारी सलाम|

मई, शहीदों का महीना

रोजावा में, और कुर्दिस्तान के बाकी हिस्सों में भी, मई के महीने का एक ख़ास महत्त्व होता है| इस महीने में हम उन शहीदों को याद करते है जिन्होंने क्रांति के लिए अपनी जाने दे दी| उन शहीदों के बिना, जिन्होंने क्रांति की सफलतापूर्वक रक्षा की, हम एक स्त्रीमुक्ति आधारित पर्यावरणवादी लोकतान्त्रिक समाज के निर्माण में शामिल नहीं हो पाते| इसीलिए शहीदों का स्मरण करना हमारे लिए हमारे इतिहास का भी स्मरण करना है|

९ मई को हमने उलरिक मेइनहॉफ का स्मरण किया| और १८ को अस्सी के दशक में तुर्कस्तान के सैन्य तानाशाही के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए डेनीज़ गेज़मिस, इब्राहिम कायपक्कया, और महमुत ज़ेनगिन को याद किया|

प्रथम शहीद, कुर्दीस्तानी मज़दूर पार्टी के सहसंस्थापक और ओजलान के करीबी दोस्त हाकी क़रीर के बलिदान के वर्षगाँठ पर हमने उनके जीवन और संघर्ष पर एक साक्षात्कार प्रकाशित किया|

३१ मई को अंतरराष्ट्रीयवादी अकादमी में हमने उता और अमारा के स्मरणार्थ एक छोटे समारोह का आयोजन किया| उता और अमारा दो अंतरराष्ट्रीयवादी थी जिनकी ३१ मई २००५ को कुर्दिस्तान के पहाड़ों में दुर्घटनावश मृत्यु हो गयी| उता एक व्यावहारिक साम्राज्यवादविरोधी अंतर्राष्ट्रीयवाद जीती थी| वो कुर्द मुक्तिसंग्राम का अर्थ उसके वैश्विक सन्दर्भ में समझती थी, और जर्मनी के क्रान्तिकारी आंदोलन के सम्बन्ध में भी, और वो उसे कभी भूली नहीं| एक साक्षात्कार में वो कुर्दीस्तानी पहाड़, अंतर्राष्ट्रीयवाद, और स्त्रीआंदोलन में काम के बारे में बात करती है| इस साक्षात्कार को हमने अंग्रज़ी में अनुवाद कर प्रकाशित किया|

उसकी दोस्त अमारा अंकारा में पलीबढ़ी| कुछ समय जेल में बिताने के बाद उसने तुर्कस्तान में और उता के साथ यूरोप में स्त्रीमुक्ति आंदोलन के लिए काम किया| उनके बरसी पर हमने अमारा के कुछ साथियों के लेख भी प्रकाशित किये|

# कुर्दिस्तान से ब्रिटैन तक भूख हड़ताल का महत्त्व

ओजलान के स्वातंत्र्य के लिए भूख हड़ताल के दौरान हमने इतिहास में भूख हड़ताल को राजकीय संघर्ष के साधन बनने के उदाहरण खोजने की कोशिश की| इंग्लैंड के कुछ कॉमरेड साथियों ने हमें इस बारे में लिखा, और सिल्विया पॅन्खर्सट, भारत के भगत सिंह और आयरलैंड के बॉबी सैंड के आंदोलनों की जानकारी दी|

मेक रोजावा ग्रीन अगेन (रोजावा को फिरसे हरा बनाओ)

मई में हमारे पर्यावरणीय काम का एक लक्ष्य हेलिन केरेकॉक्स अकादमी के क्षेत्र में वसंत में शुरू किये गए वृक्षारोपण कार्यक्रम को समाप्त करना था| हमारे अपने पौधशाला में से हमने अलग अलग पौधे जैसे नीम्बू, अनार, अंजीर, जैतून, और कुछ बाँज लगाए| हमारी मैलापानी शुद्धिकरण प्रणाली बनाने का काम भी अंतिम चरण में है| पिछले महीने के हमारे काम की प्रतिमाएं हमारी वेबसाइट पर देखी जा सकती है|

#फ्राइडेज फॉर फ्यूचर रोजावा (भविष्य के लिए शुक्रवार रोजावा)

कामिस्लॉस्थित रोजावा यूनिवर्सिटी के पाठकों और नगरपालिका के साथ मिलकर हम २४ मई को हुए दुसरे वैश्विक जलवायु हड़ताल में एक मुहीम निकालकर शामिल हुए| इस मुहीम के तहत हमने एक छोटा प्रदर्शन किया और एक सफाई अभियान भी चलाया, जिससे हमने पर्यावरण के मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया और एक साफ़सुथरे शहर की ओर योगदान भी दिया| इस मुहीम का एक छोटा विडिओ हमने प्रकाशित किया|

# “हमें अवशेषों से भय नहीं, क्योंकि हम दिलों में एक नयी दुनिया लेकर चलते है|”

जलवायु हड़ताल में हमारे सहभाग को फ्राइडेज फॉर फ्यूचर के तहत जर्मनी से एक पूंजीवादविरोधी मंच – “changeforfuture” (चेंज फॉर फ्यूचर भविष्य के लिए बदलाव) ने सराहा, जिससे रोजावा क्रांति का वैश्विक महत्त्व अधोरेखित होता है|

# फ्राइडेज फॉर फ्यूचर के साथ मेक रोजावा ग्रीन अगेन सड़कों पर

यूरोप के कई देशों में मेक रोजावा ग्रीन अगेन के कार्यकर्ताओं ने फ्राइडेज फॉर फ्यूचर के साथ जलवायु हड़ताल में हिस्सा लिया| कोपनहेगन, म्युनिक, बर्लिन, हैम्बर्ग, बार्सिलोना, जिनेवा और जुरिच में हुए प्रदर्शनों के दौरान भाषणों में रोजावा क्रांति से सीखने एवं लोकतांत्रिक और पर्यावरणवादी समाज के लिए एक साझा संघर्ष विकसित करने के बात पर जोर दिया|

# हसानकीफ में विनाश और संघर्ष

रोजावा की जलापूर्ति तुर्कस्तान के कुर्द पहाड़ों में सृत नदियों पर निर्भर है| तुर्कस्तान की सरकार उन नदियों पर अधिक से अधिक बाँध बनाकर पानी को नियंत्रित करके उसे क्रांति के खिलाफ एक राजकीय हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है| लेकिन इन विशाल योजनाओं की बदौलत पूरे पूरे शहर और हसानकीफ जैसे सांस्कृतिक महत्त्व के स्थान तबाह हो रहे है| इसके विरोध में मेक रोजावा ग्रीन अगेन अभियान दुनियाभर के अनेक संगठनों के साथ मिलकर जून ७/८ को वैश्विक कार्य दिवस घोषित करता है| इसी सन्दर्भ में इस योजना के पर्यावरणीय और सामाजिक परिणामों के ऊपर हमने एक शोधलेख प्रकाशित किया|

# RiseUp4Rojava – Smash Turkish Fascism # – रोजावा के लिए उठ खड़े हो तुर्कस्तानी फासीवाद को नष्ट करो!

यह अभियान जो एक महीने पहले शुरू हुआ, अब जोर पकड़ रहा है| पिछले महीने इटली, इंग्लैंड, जर्मनी, कॅटालॊनिया और पुर्तगाल जैसे देशों में प्रदर्शन हुए| भूख हड़ताल के साथ ही यूरोपीय सरकारों, बड़े हथियार उद्योगों और पर्यटन क्षेत्र द्वारा तुर्कस्तानी सरकार को मिल रहे समर्थन के खिलाफ भी प्रदर्शन हुए| इस समर्थन के बगैर एर्दोगान की फासीवादी राजवट और रोजावा क्रांति के खिलाफ युद्ध संभव नहीं हो पाते|

# रोजावा, वेनेज़ुएला और दक्षिण अमरीका साम्राज्यवाद और क्रांति के बीच

अंतरराष्ट्रीयवादी होने के नाते हम अपने आपको सिर्फ रोजावा से ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के मुक्ति संग्रामों से जुड़ा हुआ महसूस करते है| वेनेज़ुएला में चल रहे संघर्ष के बारे में जानने के लिए हमने कोलंबिया के होजे से वेनेज़ुएला एवं बाकी लैटिन अमरीकी देशों की स्थिति, उनके परिप्रेक्ष और रोजावा क्रांति से संबंधों के बारे में बात की|

हमें आपकी मदद चाहिए!

हमारे अंतरराष्ट्रीयवादी कम्यून और मेक रोजावा ग्रीन अगेन अभियान का लक्ष्य है समाज के बड़े आर्थिक माध्यमों का उपयोग न करते हुए अपने कार्यों को आत्मनिर्भर बनाना| इसके लिए हमें आपकी मदद चाहिए!

आर्थिक, ज्ञान और अनुवाद रूप में रोजावा के अंतरराष्ट्रीयवादी काम में अपना योगदान देनेवाले सभी साथियों का हम धन्यवाद करते है|

क्रांतिकारी सलाम,

रोजावा का अंतरराष्ट्रीयवादी कम्यून एवं

मेक रोजावा ग्रीन अगेन अभियान

जून ०८ २०१९